the delhi : ये है दिल्ली/ heart ❤️ of india New Delhi

दिल्ली की अनोखी पहचान : और टॉप १० मशहूर स्थान जो घूमने वाले की दिल चुरा ले

दिल्ली भारत की राजधानी है और इसका इतिहास व भूमिका वास्तव में अद्भुत है। यहाँ सात प्रमुख शहरों का संगम हुआ है, जो प्राचीन काल से आधुनिक युग तक की गाथाएँ बयान करता है।

प्रमुख आधुनिक शॉपिंग मॉल

> वेगास मॉल (सेक्टर 14): 28,000 वर्ग मीटर में फैला, 150+ ब्रांड्स जैसे H&M, Zara, PVR सुपरप्लेक्स (12 स्क्रीन), 650-सीट फूड कोर्ट। समय: सुबह 10 से रात 12 बजे। द्वारका सेक्टर 14 मेट्रो से 6 मिनट पैदल।

> पेसिफिक D21 मॉल (सेक्टर 21): लाइफस्टाइल, मैक्स, बिग बाजार, PVR थिएटर। समय: सुबह 11 से रात 11 बजे। मेट्रो से नजदीक

ऐतिहासिक महत्व

> महाभारत में पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ यहीं थी, जो पुरानी दिल्ली के क्षेत्र में मानी जाती है। तोमर वंश ने 736 ई. में लाल कोट बनाया, फिर पृथ्वीराज चौहान ने 1164 में किला राय पिथौरा का विस्तार किया। 1192 में मुहम्मद गोरी की जीत के बाद दिल्ली सल्तनत का केंद्र बनी।

> अलाउद्दीन खिलजी ने 1303 में सीरी किला बनवाया मंगोल आक्रमणों से बचाव हेतु। तुगलक वंश ने तुगलकाबाद और फिरोजशाह कोटला बसाए, जबकि शाहजहाँ ने 1648 में शाहजहानाबाद (पुरानी दिल्ली) और लाल किला स्थापित किया। नादिर शाह (1739) और अहमद शाह अब्दाली के आक्रमणों ने इसे लुटवाया,

> 1911 के दिल्ली दरबार में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम ने कलकत्ता से राजधानी यहाँ स्थानांतरित की, नई दिल्ली का निर्माण लुटियंस ने किया। स्वतंत्र भारत में 1950 से यह राजधानी बनी रही, आज भी संसद और राष्ट्रपति भवन सत्ता के निशानी है

> अलाउद्दीन खिलजी ने 1303 में मंगोल हमलों से बचने हेतु सीरी किला खड़ा किया। गयासुद्दीन तुगलक का तुगलकाबाद और फिरोजशाह का फिरोजशाह कोटला दिल्ली के सात शहरों में शामिल हुए। शेरशाह सूरी ने पुराना किला बनवाया, जो आज भी यमुना तट पर खड़ा है।

दिल्ली महाभारत काल में पांडवों का इंद्रप्रस्थ यहीं था, जहाँ यमुना के तट पर सभ्यता की नींव पड़ी। 736 ई. में तोमर राजा अनंगपाल ने लाल कोट बनाया, फिर पृथ्वीराज चौहान ने इसे किला राय पिथौरा नाम दिया। 1192 में मुहम्मद गोरी की विजय के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने पहला सुल्तानत शहर कुव्वत-उल-इस्लाम बसाया

न्यू सांसद भवन

आधुनिक दिल्ली का चमत्कार

स्वतंत्रता के बाद 1950 से यह लोकतंत्र का केंद्र बनी। कुतुब मीनार, हुमायूँ मकबरा जैसे यूनेस्को स्थल और मेट्रो की आधुनिकता इसे अद्भुत बनाती हैं। यहाँ हर गली एक कहानी कहती है—शक्ति, संस्कृति और पुनर्जनन की।

प्रमुख आधुनिक शॉपिंग मॉल

प्रसिद्ध पारंपरिक बाजार

चाँदनी चौक में मिठाई, कपड़े और स्ट्रीट फूड की धूम है, जबकि सरोजिनी नगर बाजार सुपर सस्ते कपड़ों और एक्सपोर्ट सरप्लस के लिए मशहूर है। कोलकाता हाउस और लाजपत नगर में फैशनेबल वियर और ज्वेलरी मिलती है। ये बाजार मॉल की चमक के साथ दिल्ली की जीवंतता दर्शाते हैं।

ऐतिहासिक स्मारक

कुतुब मीनारा
कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1192 में इसकी शुरुआत की, लेकिन इल्तुतमिश ने इसे पूरा किया। फिरोजशाह तुगलक ने पाँचवीं मंजिल जोड़ी। यह 72.5 मीटर ऊँची भारत की सबसे ऊँची ईंट की मीनार

लाल किला शाहजहाँ द्वारा निर्मित मुगल वैभव का प्रतीक है, जहाँ 15 अगस्त को प्रधानमंत्री तिरंगा फहराते हैं। कुतुब मीनार दुनिया की सबसे ऊँची ईंट मीनार है, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल। हुमायूँ का मकबरा ताजमहल की प्रेरणा स्रोत है, जिसमें चारबाग उद्यान हैं।

धार्मिक स्थल

अक्षरधाम मंदिर आधुनिक वास्तुकला और रामायण प्रदर्शनी के लिए प्रसिद्ध है। लोटस टेम्पल कमल के आकार का शांतिपूर्ण बहाई प्रार्थना स्थल। बंगला साहिब गुरुद्वारा सिख इतिहास का केंद्र है, जहाँ प्रसाद और सरोवर आकर्षण हैं।

मुख्य पर्यटक स्थल

लाल किला: भारतीय ₹35, विदेशी ₹500; सुबह 9:30 से शाम 4:30 बजे (सोमवार बंद)। कुतुब मीनार: भारतीय ₹30, विदेशी ₹500; सूर्योदय से सूर्यास्त तक (शुक्रवार को मस्जिद बंद)। हुमायूँ का मकबरा: भारतीय ₹30, विदेशी ₹500; सुबह 6 से शाम 6 बजे। पुराना किला: भारतीय ₹20, विदेशी ₹200; सुबह 7 से शाम 5 बजे

दिल्ली की कुछ बदनाम गली

जीबी रोड दिल्ली का सबसे कुख्यात रेड-लाइट क्षेत्र है, जो अजमेरी गेट से लाहौरी गेट तक फैला हुआ है। यहाँ सैकड़ों कोठे हैं जहाँ सेक्स वर्कर्स रहती हैं, और यह मानव तस्करी व अन्य अपराधों का केंद्र रहा है

राजाओं का राज्य गुजरात की अनोखी पहचान

गुजरात की अनोखी और अनसुनी जानकारी

गुजरात राज्य: भारत का पश्चिमी में स्थित राज्य है
जो अरब सागर के किनारे बसा हुआ है और गुजरात अपनी समृद्ध संस्कृति, इतिहास तथा आर्थिक प्रगति के लिए जाना जाता है।

यहाँ महात्मा गांधी की जन्मभूमि है और यह राज्य उद्योग, पर्यटन तथा कृषि का प्रमुख केंद्र है।

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साबरमति आश्रम गुजरात की ह्रदय

इतिहास और संस्कृति

इतिहास

प्राचीन काल से ही सिंधु घाटी सभ्यता के लोथल जैसे स्थल गुजरात को सभ्यता का केंद्र बनाते हैं। मौर्य काल में अशोक के गिरनार शिलालेख मिलते हैं। सोलंकी वंश (11वीं-13वीं शताब्दी) का स्वर्ण युग रहा, जब मोढ़ेरा सूर्य मंदिर और सोमनाथ मंदिर बने। सिद्धराज जयसिंह व भीमदेव प्रथम ने राज्य विस्तार किया। 1411 में अहमद शाह ने अहमदाबाद बसाया, गुजरात सल्तनत का उदय हुआ।

पोरबंदर के गांधीजी ने दांडी मार्च (1930) से नमक सत्याग्रह शुरू किया। साबरमती आश्रम स्वतंत्रता का प्रतीक बना। सरदार पटेल ने 562 रियासतों का एकीकरण किया। 1960 में महाराष्ट्र से अलग होकर गुजरात राज्य बना

संस्कृति

गरबा-डांडिया नवरात्रि के प्रतीक हैं, यूनेस्को की अमूर्त विरासत। गुजराती थाली में ढोकला, फाफड़ा, खाखरा प्रमुख। जैन प्रभाव से अहिंसा व वाणिज्य फला-फूला, पालिताना के 900 मंदिर प्रमाण। सूफी संतों ने भक्ति जोड़ी। वस्त्र उद्योग (सूरत), हीरे कारोबार और बंदरगाह (कांडला) ने वैश्विक पहचान दी।

अर्थव्यवस्था

गुजरात भारत का सबसे औद्योगिक राज्य है,
जिसकी जीएसडीपी लगभग 259 अरब डॉलर है।
यह देश के एक-तिहाई निर्यात का योगदान देता है, जिसमें हीरे (सूरत), पेट्रोकेमिकल्स (जामनगर) और कपड़ा उद्योग प्रमुख हैं।
कृषि में कपास, मूँगफली और दूध उत्पादन में अग्रणी है।

जनसंख्या

गुजरात की जनसंख्या लगभग ७ करोड़ है
यहां के साक्षात्कार दर ८२% का है

महत्वपूर्ण पर्यटक स्थान

सोमनाथ मंदिर

यह गुजरात के प्रभास पाटन में अरब सागर तट पर स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग है।

अनोखे तथ्य17 बार पुनर्निर्माण: महमूद ग़ज़नवी (1026), अलाउद्दीन खिलजी, औरंगज़ेब जैसे आक्रांताओं ने इसे कई बार तोड़ा, लेकिन हर बार फिर से बनाया गया।

चंद्रदेव की कथा: चंद्रमा (सोम) ने यहां तपस्या की, इसलिए नाम 'सोमनाथ' पड़ा। शिवपुराण में वर्णित।
स्वयंभू लिंग: यह स्वयं प्रकट ज्योतिर्लिंग माना जाता है, जिसे चंद्रमा ने स्थापित किया।वास्तुकला के चमत्कारमारू-गुर्जर शैली में बना 150 फीट ऊंचा शिखर। 212 नक्काशीदार पैनल वाले मंडप। समुद्र की लहरें मंदिर की नींव को छूती हैं।

आधुनिक इतिहास1951 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उद्घाटन किया। सरदार पटेल के प्रयास से पुनर्निर्मित। जनता के चंदे से बना।

रहस्यमयी बातें भालका तीर्थ: जहां कृष्ण का देहांत हुआ, मंदिर से 4 किमी दूर।त्रिवेणी संगम: हिरण, कपिल, सरस्वती नदियों का मिलन।रात्रि दर्शन: समुद्र तट पर चंद्रमा की रोशनी में ज्योतिर्लिंग चमकता दिखता है।

मॉडर्न गुजरात की कुछ अनोखी जानकारी

अनोखी पहल स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा (182 मीटर)

पर्यटन का नया केंद्र।GIFT सिटी: भारत का पहला इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर

सिंगापुर जैसा। डिजिटल गुजरात: सभी सरकारी सेवाएँ ऑनलाइन, ड्रोन डिलीवरी

पश्चिम बंगाल की अनोखी दुनिया में आपका स्वागत है

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पश्चिम बंगाल जहां गंगा की लहरें दुर्गा पूजा के नूपुरों से ताल मिलाती हैं

हिमालय की चोटियाँ चाय बागानों की हरियाली से लिपटी रहती हैं। यह भूमि नोबेल कवि रवींद्रनाथ टैगोर की कलम से निकली अमर रचनाओं और सुंदरबन के रहस्यमयी रॉयल बंगाल टाइगर्स का घर है!

कल्पना कीजिए, कोलकाता की गलियों में मिठाइयों की मिठास घुली हुई है, जहाँ रसगुल्ला और संदेश सिर्फ व्यंजन नहीं, बल्कि बंगाल की आत्मा के स्वाद हैं। यहाँ दार्जिलिंग की टॉय ट्रेन हवा में कोहरे की सैर कराती है,

जबकि गंगा सागर में समुद्र गंगा का मिलन आध्यात्मिक जादू जगाता है

पश्चिम बंगाल सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि संस्कृति, प्रकृति और इतिहास है

क्या आपने कभी बंगाल की लाल मिट्टी को छुआ है अगर है तो कमेंट में बताए आपको कैसा महसूस हुआ

 

बंगाल की संस्कृति

पश्चिम बंगाल की संस्कृति साहित्य, संगीत, नृत्य और त्योहारों से समृद्ध है। दुर्गा पूजा, काली पूजा प्रमुख हैं। रसगुल्ला, संदेश जैसी मिठाइयाँ प्रसिद्ध। रवींद्र संगीत, जात्रा और बाउल गीत इसकी आत्मा हैं।

मुख्य भाषा

पश्चिम बंगाल की मुख्य भाषा बांग्ला (बंगाली) है।
और लगभग 86% आबादी की मातृभाषा। अंग्रेजी सह-आधिकारिक है, हिंदी, उर्दू, नेपाली आदि भी बोली जाती हैं।

बांग्ला भाषा इंडो-आर्यन भाषा परिवार से है। इसकी उत्पत्ति संस्कृत से प्राकृत, फिर मागधी अपभ्रंश होते हुए 10वीं शताब्दी में हुई।

यहां की मुख्य व्यंजन

पश्चिम बंगाल का मुख्य भोजन चावल और मछली है। इलिश माछेर झोल, चिंगड़ी मलाई करी प्रसिद्ध हैं। मिठाइयों में रसगुल्ला, संदेश प्रमुख।

कुछ अनसुनी बाते

बंगाल की कई अनसुनी बातें हैं जो इसके इतिहास, संस्कृति और आधुनिक पहलुओं को नया रूप देती हैं। ये जानकारियां आपको आकर्षित करेंगी क्योंकि ये सामान्य किताबी ज्ञान से हटकर हैं।प्राचीन व्यापार का राज़बंगाल प्राचीन काल में सिल्क रोड का प्रमुख केंद्र था, जहां से मलमल के कपड़े (मस्लिन) फारस, अरब और भूमध्यसागर तक निर्यात होते थे। यह क्षेत्र एक थलासोक्रेसी (समुद्री साम्राज्य) था, जो वैदिक काल की सबसे पुरानी नगरीय सभ्यताओं का घर था। हुसैन शाही स्वर्ण युग1494-1538 के बीच हुसैन शाही राजवंश ने बंगाल को सांस्कृतिक ऊंचाई दी, जहां मुस्लिम सुल्तानों ने संस्कृत महाकाव्यों जैसे रामायण का बांग्ला अनुवाद करवाया।
हिंदू और मुस्लिम परंपराओं का मिश्रण हुआ, जिससे बांग्ला साहित्य ने संस्कृत को पीछे छोड़ दिया। सेना राजवंश की पुनरुत्थान12वीं शताब्दी में विजय सेन ने पाल साम्राज्य को हराकर हिंदू धर्म का पुनरुद्धार किया और दक्षिण-उत्तर भारत से ब्राह्मणों को आमंत्रित किया। बल्लाल सेन जैसे विद्वान राजाओं ने दर्शन और शासन को मजबूत किया। बंगाली संस्कृति का मेलजोलशशांक जैसे प्रारंभिक हिंदू राजा से लेकर पाल बौद्ध राजवंश तक, बंगाल में हिंदू-बौद्ध संघर्ष चला, लेकिन बाद में समन्वय हुआ।
बंगाल सल्तनत में हिंदू राजा जैसे प्रतापादित्य ने मुगलों का डटकर मुकाबला किया।आधुनिक विरासतब्रिटिश काल में कोलकाता (कलकत्ता) भारत की राजधानी रहा, जो विश्व व्यापार का केंद्र था। आज पश्चिम बंगाल में शरणार्थी प्रवास ने इसकी राजनीति और संस्कृति को नया आकार दिया।

बिहार पुरानी ग़ौरव से आधुनिक विकास तक का सफर

भारत की गौरवशाली राज्य बिहार की परिचय

बिहार: अमर गाथा का स्वर्णिम पुष्पकल्पना कीजिए, की गंगा की गोद में बसे भारत के उस पावन नगरी को,
जहाँ ५०० ईसा पूर्व बोधगया के पीपल वृक्ष तले गौतम बुद्ध को ज्ञानोदय हुआ। वहाँ ध्यानमग्न सिद्धार्थ का हृदय उद्घाटित हो गया, और भगवान बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग ने विश्व को शांति का संदेश दिया।

बिहार जहां नालंदा विश्वविद्यालय, प्राचीन जगत का ऑक्सफोर्ड, जहाँ १०,००० छात्र और २,००० आचार्य ज्ञान की ज्योति जलाते थे

चीनी यात्री ह्वेनसांग की आँखें चकाचौंध हो गईं। विक्रमशिला के तांत्रिक रहस्यों ने तिब्बत तक दीपक जलाया।

बिहार जहां मगध साम्राज्य की गर्जना सुने होंगे ! चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की नीतियों से सिकंदर को पीछे धकेला, अशोक ने कलिंग की रक्तिम धरती पर बौद्ध धर्म अपनाकर अहिंसा का परचम लहराया।

पाटलिपुत्र की भव्यता ने यूनानी यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गुप्त काल में समुद्रगुप्त की वीणा और चंद्रगुप्त द्वितीय की विजय ने स्वर्णयुग रचा।मध्यकाल में शेरशाह सूरी ने ग्रैंड ट्रंक रोड बनाकर भारत को जोड़ा, और तेनालीराम जैसे कवियों ने लोककथाओं को अमर किया।

आजादी की लपटों में जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का उद्घोष किया। बिहार—ज्ञान, शक्ति और संस्कृति का महाकाव्य, जो हर पाठक को इतिहास के प्रवाह में बहा ले जाता है। यह भूमि अमर भूमि बिहार की आह्वान करती है: जय बिहार जय बिहारी जागो बिहारी

बिहार की प्रमुख भाषा

बिहार की मुख्य भाषा हिंदी है लेकिन अलग अलग क्षेत्र में अलग अलग भाषा का इस्तेमाल भी किया जाता हैं जैसे
भोजपुरी
मगही
मैथिली इत्यादि

मुख्य खाना

लिटी चोखा

इतिहास

मगध साम्राज्य
मगध का मुख्य क्षेत्र आधुनिक बिहार के दक्षिणी भाग में गंगा नदी के दक्षिण था। पहली राजधानी राजगृह (आज का राजगीर) थी, बाद में पाटलिपुत्र (आज का पटना) बनी। यह पंच पर्वतों से सुरक्षित था।

मगध साम्राज्य के प्रमुख शासक
> बिम्बिसार
>अजातशत्रु
> महापद्मनंद। जिसके पास भारत की सबसे विशाल सेना थीं।

मगध साम्राज्य का पतन

गुप्त काल के बाद मगध की शक्तियों में कमी आने लगी और धीरे धीरे खत्म हो गया

संस्कृति और परंपरा

बिहार की संस्कृति विविधता और गहराई का अनमोल खजाना है।
यहाँ भोजपुरी, मैथिली और मगही भाषाओं का सहज संगीत बहता है, जबकि में मधुबनी पेंटिंग, कढ़ाई और कला विश्व पटल पर चमकती हैं।

बिहार की प्रमुख त्योहारछठ पूजा: है जो कि सूर्य देव की आराधना का विश्वविख्यात पूजा है, कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर गंगा-तटों पर पंच मेवा और नारियल और अनेकों प्रकार का पकवान चढ़ाया जाता है। चार दिनों का व्रत और ठेकुआ का स्वाद अद्भुत होता है।

मकर संक्रांति: तिल-गुड़ और पतंगबाजी के साथ सर्दियों का स्वागत।

सोनपुर मेला: एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला, गंगा-गंडक संगम पर हाथी-घोड़े और गायों की रौनक।

सम्राट अशोक की जयंती और बिहार दिवस: 22 मार्च को राज्य गौरव का उत्सव।
लोक कलाएँ और परंपराएँभोजपुरी लोकगीत (लोरिकायन, बिदेसिया), झिझिया नृत्य और कजरी गायन ग्रामीण जीवन को जीवंत करते हैं। जितिया व्रत में माताएँ संतान के लिए कठोर तप करती हैं। यह सांस्कृतिक धरोहर बिहार को अनूठा बनाती है।

सोनपुर मेला

बिहार की चुनौतियां

बिहार चुनौतियों से जूझता और प्रगति की उड़ान भरता एक प्रेरणादायक राज्य है। यहां पर गरीबी और बाढ़ की मार झेलते हुए भी यह विकास की नई कहानी लिख रहा है।

प्रमुख चुनौतियाँ बेरोजगारी का भूत: 20 लाख+ युवा नौकरी की प्रतीक्षा में। पलायन आम बात – हर साल करोड़ों बिहारी दूसरे राज्यों में मजदूरी करते हैं।

2026 में 1 करोड़ रोजगार देने का मेगा वादा सरकार पर दबाव बना रहे यहां के लोग।
बाढ़ का कहर: कोसी-गंगा हर मानसून विनाश लाती हैं। 70% भूमि बाढ़ प्रभावित, लाखों बेघर।
खजाना खाली: महिला योजनाओं, पेंशन से राजकोष पर बोझ। निवेश आकर्षित करना बड़ी चुनौती।

शिक्षा-स्वास्थ्य कमजोर: स्कूलों में शिक्षक भारी कमी, अस्पतालों में डॉक्टरों की किल्लत।
रोमांचक प्रगतिमेगा प्रोजेक्ट्स: 2026 तक 10 बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर – नए मेडिकल कॉलेज (मधुबनी, भोजपुर), बिजली प्लांट, कमला बैराज। स्वच्छ ऊर्जा से आत्मनिर्भरता। निवेश का उफान: 1.80 लाख करोड़ के प्रस्ताव, चीनी मिलें पुनर्जीवित।

उद्योग मंत्री दूसरे राज्यों में उद्यमियों को लुभा रहे। महिला सशक्तिकरण: प्रमाण पत्र योजना से लाखों महिलाओं को आर्थिक आजादी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था बदलाव के दौर में। कनेक्टिविटी क्रांति: नई सड़कें, पुल, पटना मेट्रो – बिहार मुख्यधारा में। तुलनात्मक नजरिया बिहार के सीएम श्री नीतीश कुमार की सरकार के सामने 2026 परिक्षा का वर्ष है। वादे पूरे हुए तो बिहार उड़ान की रास्ते पर चल रहा है

उत्तर प्रदेश संस्कृति, और जरूरी इतिहास

उत्तर प्रदेश ये सिर्फ एक राज्य का नाम नहीं है

उत्तर प्रदेश इसे भारत देश का ह्रदय भी कहा जाता है

अयोध्या राम मंदिर जहां भगवान श्री राम का जन्म हुआ
प्रेम का प्रतीक कहे जाने वाला दुनिया का ७ वा अजूबा ताजमहल
महा कुम्भ मेला का एक अदभुत पिक्चर
विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला महा कुम्भ मेला

दुनिया के ऐतिहासिक मन्दिरों में से एक श्री राम मंदिर

ये मंदिर राम जन्मभूमि अयोध्या के पावन धरती पर बना है
इसका निर्माण राम मंदिर का विवाद 16वीं शताब्दी से चला आ रहा है, जब मुगल सम्राट बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई1992 में मस्जिद के ध्वंस के बाद लंबी कानूनी लड़ाई चली, और 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर निर्माण की अनुमति दी।
22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राण प्रतिष्ठ संपन्न कराई।
निर्माण विवरणमंदिर नागर शैली में बना है, जिसमें 392 स्तंभ, 44 प्रवेश द्वार और तीन मंजिला संरचना है। गर्भगृह में भगवान रामलला की मूर्ति विराजमान है, जबकि पहली मंजिल पर राम दरबार है।
निर्माण श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा देखरेख में हो रहा है, जिसमें कोई लोहा नहीं इस्तेमाल किया गया।

दुनिया के ऐतिहासिक अजूबा में से एक
ताजमहल की चार मीनारें 41.6 मीटर ऊँची हैं और जानबूझकर बाहर की ओर थोड़ा झुकी हुई हैं, ताकि भूकंप में मुख्य मकबरे पर न गिरें।
इसका मुख्य गुंबद प्याज के आकार का है, जो 73 मीटर ऊँचा है और कुतुब मीनार से भी थोड़ा अधिक लंबा।
मुख्य द्वार लाल बलुआ पत्थर का है, जिस पर कुरान की आयतें इतनी कुशलता से उकेरी गई हैं कि सभी अक्षर एक समान दिखते हैं।
निर्माण रहस्ययह 1632 से 1653 तक 22 वर्षों में बना, जिसमें 20,000 से अधिक कारीगरों ने काम किया और कोई सीमेंट नहीं इस्तेमाल हुआ—सिर्फ जिप्सम और संगमरमर का विशेष मिश्रण।
पूरा परिसर 17 हेक्टेयर में फैला है, जिसमें चारबाग उद्यान और मस्जिद शामिल हैं।

पहनावा

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साड़ी और कुर्ती कुछ मॉडर्न फैशन में जींस और टी शर्ट भी पहनती है

मर्द/मेन
शूट पेंट कुछ किसान धोती कुर्ता और नौजवान पेंट शर्ट

प्यारी फैमिली
मॉडर्न सिटी

संस्कृति का सूर्यास्त: भारत की धरोहर डूबने को

ऐसे लोगों का मकसद सिर्फ अपनी पहचान बनाना है! चाहे इसके लिए उन्हें कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े!

खास कर हमारे भारत देश के शहरी क्षेत्र

अगर मै बात करूं तो यहां पर हम किसी से कम नही के चक्कर में लड़कों की बराबरी करने के चक्कर में! लड़कियां भी सोशल मीडियो पर एक नई ऊंचाई को छुने के चक्कर में एक एक कर के बदन से कपड़े उतारते जा रही है! ऐसे लडकियों के मन का ये भरम है कि उसकी खूबसूरती उसके जिस्म की नुमाइश में है
अगर ऐसा होता तो आज दुनिया में सबसे ज्यादा खूबसूरत वो लड़कियां होती जो किसी ना किसी मज़बूरी में उन गालियों में अपनी जिस्म बेचती

जहां मर्द अपनी अईयासखना बना रखे है

मेरा मतलब सिर्फ उन लड़कियों या लड़को से नहीं है जो ये सब देखकर भी अपनी बहन ,बेटी और अपनी माशूका को समझाते नहीं है

बल्कि उनको और लाइक और कमेन्ट करके उनकी हौसले को और बढ़ावा देते है
दोस्तों हम सब जानते हैं क्या सही और क्या गलत है लेकिन ये सब जान कर भी हम जिस फैशन के अंधे समाज में समाएं जा रहे है इसका क्या अंत होगा एक बार आप सब विचार कीजियेगा !
कही ऐसा ना हो कि हमारे भारत देश की जो पहचान होती है हमरी संस्कृति हम उसे भी बहुत जल्दी ही खो दे!

मैं ये मानता हूं कि आज के आधुनिक फैशन में हमारी प्राचीन संस्कृति जीवंत हो उठती है। साड़ी का लहंगा-चोली फ्यूजन, कुर्ते पर जींस या शेरवानी के साथ इंडो-वेस्टर्न ब्लेजर—ये सब हमारी घाघरा, धोती-कुर्ता और सलवार सूट की विरासत को नया रूप देते हैं। रानी लक्ष्मीबाई की वीरता से प्रेरित सशक्त लुक आज रैंप पर चमकते हैं। हमारी संस्कृति विश्व पटल पर गर्व से लहरा रही लेकिन आप सभीसे निवेदन हैं कि इसे गंदा नहीं करे कम से कम ऐसे ही रहने दे—मेरा भारत महान्