भारत की गौरवशाली राज्य बिहार की परिचय
बिहार: अमर गाथा का स्वर्णिम पुष्पकल्पना कीजिए, की गंगा की गोद में बसे भारत के उस पावन नगरी को,
जहाँ ५०० ईसा पूर्व बोधगया के पीपल वृक्ष तले गौतम बुद्ध को ज्ञानोदय हुआ। वहाँ ध्यानमग्न सिद्धार्थ का हृदय उद्घाटित हो गया, और भगवान बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग ने विश्व को शांति का संदेश दिया।
बिहार जहां नालंदा विश्वविद्यालय, प्राचीन जगत का ऑक्सफोर्ड, जहाँ १०,००० छात्र और २,००० आचार्य ज्ञान की ज्योति जलाते थे
चीनी यात्री ह्वेनसांग की आँखें चकाचौंध हो गईं। विक्रमशिला के तांत्रिक रहस्यों ने तिब्बत तक दीपक जलाया।
बिहार जहां मगध साम्राज्य की गर्जना सुने होंगे ! चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की नीतियों से सिकंदर को पीछे धकेला, अशोक ने कलिंग की रक्तिम धरती पर बौद्ध धर्म अपनाकर अहिंसा का परचम लहराया।
पाटलिपुत्र की भव्यता ने यूनानी यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गुप्त काल में समुद्रगुप्त की वीणा और चंद्रगुप्त द्वितीय की विजय ने स्वर्णयुग रचा।मध्यकाल में शेरशाह सूरी ने ग्रैंड ट्रंक रोड बनाकर भारत को जोड़ा, और तेनालीराम जैसे कवियों ने लोककथाओं को अमर किया।
आजादी की लपटों में जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का उद्घोष किया। बिहार—ज्ञान, शक्ति और संस्कृति का महाकाव्य, जो हर पाठक को इतिहास के प्रवाह में बहा ले जाता है। यह भूमि अमर भूमि बिहार की आह्वान करती है: जय बिहार जय बिहारी जागो बिहारी
बिहार की प्रमुख भाषा
बिहार की मुख्य भाषा हिंदी है लेकिन अलग अलग क्षेत्र में अलग अलग भाषा का इस्तेमाल भी किया जाता हैं जैसे
भोजपुरी
मगही
मैथिली इत्यादि
मुख्य खाना
लिटी चोखा
इतिहास
मगध साम्राज्य
मगध का मुख्य क्षेत्र आधुनिक बिहार के दक्षिणी भाग में गंगा नदी के दक्षिण था। पहली राजधानी राजगृह (आज का राजगीर) थी, बाद में पाटलिपुत्र (आज का पटना) बनी। यह पंच पर्वतों से सुरक्षित था।
मगध साम्राज्य के प्रमुख शासक
> बिम्बिसार
>अजातशत्रु
> महापद्मनंद। जिसके पास भारत की सबसे विशाल सेना थीं।
मगध साम्राज्य का पतन
गुप्त काल के बाद मगध की शक्तियों में कमी आने लगी और धीरे धीरे खत्म हो गया
संस्कृति और परंपरा
बिहार की संस्कृति विविधता और गहराई का अनमोल खजाना है।
यहाँ भोजपुरी, मैथिली और मगही भाषाओं का सहज संगीत बहता है, जबकि में मधुबनी पेंटिंग, कढ़ाई और कला विश्व पटल पर चमकती हैं।
बिहार की प्रमुख त्योहारछठ पूजा: है जो कि सूर्य देव की आराधना का विश्वविख्यात पूजा है, कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर गंगा-तटों पर पंच मेवा और नारियल और अनेकों प्रकार का पकवान चढ़ाया जाता है। चार दिनों का व्रत और ठेकुआ का स्वाद अद्भुत होता है।
मकर संक्रांति: तिल-गुड़ और पतंगबाजी के साथ सर्दियों का स्वागत।
सोनपुर मेला: एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला, गंगा-गंडक संगम पर हाथी-घोड़े और गायों की रौनक।
सम्राट अशोक की जयंती और बिहार दिवस: 22 मार्च को राज्य गौरव का उत्सव।
लोक कलाएँ और परंपराएँभोजपुरी लोकगीत (लोरिकायन, बिदेसिया), झिझिया नृत्य और कजरी गायन ग्रामीण जीवन को जीवंत करते हैं। जितिया व्रत में माताएँ संतान के लिए कठोर तप करती हैं। यह सांस्कृतिक धरोहर बिहार को अनूठा बनाती है।