ऐसे लोगों का मकसद सिर्फ अपनी पहचान बनाना है! चाहे इसके लिए उन्हें कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े!


खास कर हमारे भारत देश के शहरी क्षेत्र

अगर मै बात करूं तो यहां पर हम किसी से कम नही के चक्कर में लड़कों की बराबरी करने के चक्कर में! लड़कियां भी सोशल मीडियो पर एक नई ऊंचाई को छुने के चक्कर में एक एक कर के बदन से कपड़े उतारते जा रही है! ऐसे लडकियों के मन का ये भरम है कि उसकी खूबसूरती उसके जिस्म की नुमाइश में है
अगर ऐसा होता तो आज दुनिया में सबसे ज्यादा खूबसूरत वो लड़कियां होती जो किसी ना किसी मज़बूरी में उन गालियों में अपनी जिस्म बेचती

जहां मर्द अपनी अईयासखना बना रखे है


मेरा मतलब सिर्फ उन लड़कियों या लड़को से नहीं है जो ये सब देखकर भी अपनी बहन ,बेटी और अपनी माशूका को समझाते नहीं है

बल्कि उनको और लाइक और कमेन्ट करके उनकी हौसले को और बढ़ावा देते है
दोस्तों हम सब जानते हैं क्या सही और क्या गलत है लेकिन ये सब जान कर भी हम जिस फैशन के अंधे समाज में समाएं जा रहे है इसका क्या अंत होगा एक बार आप सब विचार कीजियेगा !
कही ऐसा ना हो कि हमारे भारत देश की जो पहचान होती है हमरी संस्कृति हम उसे भी बहुत जल्दी ही खो दे!

मैं ये मानता हूं कि आज के आधुनिक फैशन में हमारी प्राचीन संस्कृति जीवंत हो उठती है। साड़ी का लहंगा-चोली फ्यूजन, कुर्ते पर जींस या शेरवानी के साथ इंडो-वेस्टर्न ब्लेजर—ये सब हमारी घाघरा, धोती-कुर्ता और सलवार सूट की विरासत को नया रूप देते हैं। रानी लक्ष्मीबाई की वीरता से प्रेरित सशक्त लुक आज रैंप पर चमकते हैं। हमारी संस्कृति विश्व पटल पर गर्व से लहरा रही लेकिन आप सभीसे निवेदन हैं कि इसे गंदा नहीं करे कम से कम ऐसे ही रहने दे—मेरा भारत महान्

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