सच में कितनी खास है?वैज्ञानिकों के रिकॉर्ड के अनुसार अभी तक ब्रह्मांड में धरती ही एकमात्र ऐसी जगह है जहाँ जीवन होने की पक्की पुष्टि है।

वैज्ञानिकों ने हजारों एक्सोप्लैनेट खोज लिए हैं लेकिन अभी तक ब्रह्मांड में धरती ही एकमात्र ऐसी जगह है किसीकि ऐसी संतुलित रचना अभी तक किसी और ग्रह पर नहीं मिली.

धरती जैसा जीवन नहीं दिखा.धरती की परतें और हमारा नाज़ुक धरती ऊपर से ठोस दिखती है, लेकिन इसकी संरचना एक प्याज़ की तरह कई परतों वाली है

क्रस्ट (ऊपरी परत), मैंटल और कोर (भीतरी भाग). क्रस्ट की मोटाई कहीं-कहीं सिर्फ कुछ किलोमीटर से लेकर लगभग 70 किलोमीटर तक है, यानी जिस ज़मीन पर शहर खड़े हैं वह ब्रह्मांड के हिसाब से बहुत ही पतली परत है।

सांस लेने लायक हवा – एक दुर्लभ तोहफ़ाधरती के वातावरण में करीब 21% ऑक्सीजन है, जो जटिल जीवन (इंसान, जानवर) के लिए ज़रूरी स्तर है।
एक्सोप्लैनेट्स के वायुमंडल पर चल रहे ताज़ा अध्ययन दिखाते हैं. भले ही कुछ पर पानी या बादलों के संकेत दिखे हों।. घूमती हुई धरती. बनता हुआ समयधरती अपनी धुरी पर लगभग 24 घंटे में एक चक्कर लगाती है इसी से दिन और रात बनते हैं।

यह घुमाव बिल्कुल स्थिर नहीं. समय के साथ बहुत सूक्ष्म बदलाव आते हैं, इसलिए वैज्ञानिक समय-समय पर “लीप सेकंड” जोड़कर आधिकारिक समय को धरती के घुमाव के साथ संतुलित करते हैं. अंतरिक्ष से धरती कैसी दिखती है?NASA के अनुसार अंतरिक्ष से धरती नीले, सफेद और भूरे रंगों का एक जीवंत मिश्रण दिखती है नीला पानी, सफेद बादल और भू-भाग की अलग-अलग बनावट।
अंतरिक्ष यात्री इसे “पेल ब्लू डॉट” यानी एक छोटा, नीला बिंदु कहते हैं, जो याद दिलाता है कि पूरा मानव इतिहास इसी छोटे से ग्रह पर सिमटा हुआ है।





































